राजभाषा अधिकारी के कार्य: अनुवाद और कार्यान्वयन की पूरी जानकारी


 

राजभाषा अधिकारी के कार्य

(Functions of Rajbhasha Officer)

प्रस्तावना : 

    भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ प्रशासनिक कार्यों में भाषाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त होने के बाद सरकारी कार्यालयों में इसके प्रयोग, प्रचार और अनुपालन की जिम्मेदारी राजभाषा अधिकारी पर होती है। राजभाषा अधिकारी न केवल सरकारी दस्तावेज़ों का अनुवाद करता है, बल्कि राजभाषा अधिनियम एवं नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन को भी सुनिश्चित करता है।

राजभाषा अधिकारी के कार्य मुख्यतः दो भागों—अनुवाद और कार्यान्वयन में विभाजित होते हैं। अनुवाद के अंतर्गत अंग्रेज़ी से हिंदी तथा हिंदी से अंग्रेज़ी में सरकारी दस्तावेज़ों का द्विभाषी अनुवाद किया जाता है, जबकि कार्यान्वयन के अंतर्गत कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना, तिमाही रिपोर्ट तैयार करना, समीक्षा करना और कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

यह लेख राजभाषा अधिकारी के कार्य, धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले दस्तावेज़ों, तिमाही रिपोर्ट, समीक्षा प्रक्रिया तथा हिंदी प्रचार-प्रसार से संबंधित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करता है, जो विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और राजभाषा से जुड़े सभी पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

विषय विवेचन : 

    राजभाषा अधिकारी / अनुवाद अधिकारी का कार्य मुख्यतः दो भागों में विभाजित होता है, 
  1. अनुवाद (Translation)
  2. कार्यान्वयन (Implementation)

अनुवाद (Translation)

    राजभाषा अधिकारी का पहला और प्रमुख कार्य अनुवाद से संबंधित होता है। इसमें दो भाषाओं के बीच अनुवाद किया जाता है, 

  • अंग्रेज़ी से हिंदी हिंदी से अंग्रेज़ी

क्या-क्या अनुवाद करना होता है?

    सरकारी कार्यालयों में राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले कुछ अनिवार्य दस्तावेज़ों का अनुवाद किया जाता है। ये सभी दस्तावेज़ द्विभाषी (हिंदी और अंग्रेज़ी) होने चाहिए।

धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले दस्तावेज़

  1. सामान्य आदेश (General Orders)
  2. संकल्प (Resolutions)
  3. परिपत्र (Circulars)
  4. नियम (Rules)
  5. अधिसूचनाएँ (Notifications)
  6. प्रशासनिक अथवा अन्य प्रतिवेदन (Administrative or Other Reports)
  7. प्रेस विज्ञप्तियाँ (Press Communiqués)
  8. संविदाएँ (Contracts)
  9. करार (Agreements)
  10. अनुज्ञप्तियाँ (Licences)
  11. अनुज्ञा-पत्र (Permits)
  12. सूचनाएँ (Notices)
  13. निविदा प्रारूप (Tender Forms)
  14. संसद के किसी सदन अथवा दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले राजकीय कागजात 

इनके अतिरिक्त अन्य दस्तावेज़ों का अनुवाद इस बात पर निर्भर करता है कि राजभाषा अधिकारी किस विभाग में कार्यरत है

कार्यान्वयन (Implementation)

    राजभाषा अधिकारी का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य राजभाषा हिंदी के प्रयोग का कार्यान्वयन करना है। इसके अंतर्गत हिंदी का प्रचार-प्रसार करना तथा राजभाषा अधिनियम और नियमों के पालन को सुनिश्चित करना शामिल है।
यह देखा जाता है कि, 
  • कार्यालय का कार्य हिंदी और अंग्रेज़ी—दोनों भाषाओं में हो रहा है या नहीं
  • निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति हो रही है या नहीं

राजभाषा के क्षेत्र

राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए देश को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, 
  • क क्षेत्र – उत्तर भारत
  • ख क्षेत्र – पश्चिमी एवं मध्य भारत
  • ग क्षेत्र – दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्वी भारत तथा संघ शासित प्रदेश
इन क्षेत्रों के अनुसार हिंदी प्रयोग की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।

वार्षिक कार्यक्रम और लक्ष्य

    राजभाषा विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष एक वार्षिक कार्यक्रम निर्धारित किया जाता है, जिसमें हिंदी प्रयोग से संबंधित लक्ष्य तय किए जाते हैं। राजभाषा अधिकारी का दायित्व होता है कि वह इन लक्ष्यों को ध्यान में रखकर कार्य करे। 

कार्यालयी कार्य और हिंदी प्रयोग

    किसी भी कार्यालय में कार्य मुख्यतः फाइलों के माध्यम से होता है, जैसे,
  • नोटिंग
  • ड्राफ्टिंग
  • पत्राचार
राजभाषा अधिकारी यह सुनिश्चित करता है कि: 
  • फाइलों में टिप्पणियाँ हिंदी में हो रही हैं या नहीं, 
  • पत्राचार हिंदी में हो रहा है या नहीं,
  • अनुवादित दस्तावेज़ लक्ष्य के अनुरूप हैं या नहीं। 

रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है?

    हिंदी कार्य की प्रगति को दर्ज करने के लिए तिमाही रिपोर्ट और समीक्षा रिपोर्ट भरी जाती हैं।

तिमाही रिपोर्ट क्या है?

    एक वर्ष को चार तिमाहियों में बाँटा जाता है, 
  • जनवरी–मार्च 
  • अप्रैल–जून  
  • जुलाई–सितंबर 
  • अक्टूबर–दिसंबर

तिमाही रिपोर्ट के भाग 

  • प्रथम भाग – प्रत्येक तिमाही में भरा जाता है । 
  • द्वितीय भाग – मार्च तिमाही की समाप्ति के बाद वार्षिक रिपोर्ट में सम्मिलित किया जाता है। 
इस रिपोर्ट का एक निर्धारित प्रारूप होता है, जिसमें राजभाषा नियमों के अंतर्गत आँकड़े भरे जाते हैं, जैसे
  • धारा 3(3) के अंतर्गत दस्तावेज़ हिंदी में हैं या नहीं,
  • हिंदी में आयोजित कार्यशालाओं की संख्या,
  • प्रशासनिक बैठकों में हिंदी प्रयोग,
  • फाइलों में हिंदी टिप्पणियों की संख्या। 
इन आँकड़ों के आधार पर पूरे वर्ष की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है।

समीक्षा क्यों की जाती है?

समीक्षा के दौरान यह देखा जाता है कि, 
  • वार्षिक कार्यक्रम में निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति हो रही है या नहीं, 
  • राजभाषा अधिनियम और नियमों का पालन हो रहा है या उल्लंघन यदि अनुपालन हो रहा है, तो संबंधित कार्यालय को सराहना दी जाती है यदि कमी पाई जाती है, तो कार्यालय को प्रोत्साहित और मार्गदर्शन दिया जाता है।

प्रशिक्षण और प्रोत्साहन योजनाएँ

इसके अतिरिक्त: 
  • कितने कर्मचारियों को हिंदी का प्रशिक्षण प्राप्त है, 
  • किन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है, 
  • यह सब नियम 10(4) के अंतर्गत ट्रैक किया जाता है। 

निष्कर्ष

    इस प्रकार, राजभाषा अधिकारी का कार्य मुख्यतः अनुवाद और कार्यान्वयन से जुड़ा होता है। हालाँकि, कार्य की प्रकृति में थोड़ा अंतर हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि अधिकारी मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय या किसी विशेष शाखा में कार्यरत है।

राजभाषा अधिकारी के कार्य



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