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विश्व हिंदी दिवस : इतिहास, महत्व और उद्देश्य

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  विश्व हिंदी दिवस क्या है?      विश्व हिंदी दिवस हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और विश्वभर में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना है। प्रस्तावना      हिंदी केवल भारत की एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और संस्कृति की पहचान है। आज हिंदी भारत के अलावा अनेक देशों में बोली और समझी जाती है। वैश्वीकरण के इस युग में जब अंग्रेज़ी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, तब हिंदी जैसी समृद्ध भाषा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है, ताकि हिंदी भाषा को वैश्विक पहचान मिल सके और प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों में भी हिंदी के प्रति रुचि बढ़े। विश्व हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?      विश्व हिंदी दिवस हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इस तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया था।  इस सम्मेल...

राजभाषा अधिनियम 1963 क्या है? उद्देश्य, प्रावधान और महत्व | हिंदी में पूरी जानकारी

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प्रस्तावना :       भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहाँ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं। इस भाषाई विविधता के बावजूद देश के शासन-प्रशासन को सुचारु रूप से चलाने के लिए एक सामान्य भाषा की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत संघ की राजभाषा घोषित किया। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार, 26 जनवरी 1950 से अगले 15 वर्षों तक अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग सरकारी कार्यों में जारी रखने की व्यवस्था की गई थी। जब यह अवधि 1965 में समाप्त होने वाली थी, तब गैर-हिंदी भाषी राज्यों में यह आशंका उत्पन्न हुई कि केवल हिंदी लागू होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इसी स्थिति को संतुलित करने के लिए राजभाषा अधिनियम, 1963 लागू किया गया। विषय-विवेचन :  1. राजभाषा अधिनियम 1963 क्या है?       राजभाषा अधिनियम, 1963 एक ऐसा कानून है, जो यह निर्धारित करता है कि संघ के राजकीय प्रयोजनों, संसद, केंद्र और राज्यों के बीच संचार तथा न्यायालयों में हिंदी और अंग्रेज़ी का प्रयोग किस प्रकार किया जाएगा। ...

त्रिभाषा सूत्र : भारत की भाषाई एकता का आधार

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1.1 प्रस्तावना      भारत एक बहुभाषिक देश है। यहाँ भाषाओं की विविधता हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। भौगोलिक परिस्थितियाँ, खानपान, रहन-सहन और परंपराओं के साथ-साथ भाषा के स्तर पर भी भारत अत्यंत विविध दिखाई देता है। ऐसे देश में राष्ट्रीय स्तर पर संवाद, एकता और आपसी समझ बनाए रखने के लिए एक सुविचारित भाषा नीति की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता से त्रिभाषा सूत्र की अवधारणा सामने आई।  1.2 विषय विवेचन   1.2.1 त्रिभाषा सूत्र क्या है?      त्रिभाषा सूत्र का अर्थ है—देश के प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से विद्यार्थियों को कम से कम तीन भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए। इस सूत्र को औपचारिक रूप से 1968 में कोठारी आयोग की सिफारिशों के आधार पर लागू किया गया। 1.2.2 इसका मुख्य उद्देश्य था  राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्षम बनाना  1.2.3 त्रिभाषा सूत्र में शामिल भाषाएँ      त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत निम्नलिखित तीन भाषाएँ अनिवार्य मानी गई हैं,...

हिंदी राष्ट्रभाषा या राजभाषा - सौरभ कांबले

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हिंदी राष्ट्रभाषा या राजभाषा - सौरभ कांबले 1.1 प्रस्तावना :      भारत में हिंदी भाषा को लेकर अक्सर यह विवाद देखने को मिलता है कि हिंदी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा। भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाएँ हैं तथा लगभग 3000 से अधिक बोलियाँ प्रचलित हैं। ऐसी भाषिक विविधता वाले देश में भाषा से संबंधित भ्रम उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इसी कारण यह प्रश्न उठता है कि हिंदी भाषा की वास्तविक स्थिति क्या है। प्रस्तुत लेख में हिंदी भाषा की संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। 1.2 विषय विवेचन :     भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहाँ अनेक भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलन में हैं।इसलिए भाषा और पहचान का प्रश्न हमेशा केंद्र में रहा है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज की सोच और चेतना को भी आकार देती है। मीडिया, समाज और लोकतंत्र के बीच के इस गहरे संबंध को समझने के लिए लोकशाहीचा चौथा स्तंभ आणि आधुनिक पत्रकारिता इस लेख में पत्रकारिता की भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया गया है। स्वतंत्रता से पूर्व हिंदी भाषा ने देश के विभिन्न वर्ग...

मनुच्या अंधारातून भीमाच्या प्रकाशाकडे नेणारी कविता

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 “मनुच्या अंधारातून भीमाच्या प्रकाशाकडे नेणारी कविता…” ✒️ कविता : स्वलिखित | वैचारिक प्रेरणा : डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर © सर्व हक्क लेखकाकडे राखीव काळी रात्र ती मनुची, जिथे स्त्रीला स्थान नव्हते, माणूस म्हणून जगण्याचे, तिला कोणतेच भान नव्हते. चितेवर चढवून तिचे, अस्तित्व त्यांनी जाळले, पण माझ्या भीमाने गड्या, तिचे नशीबच बदलले! "फेकून द्या त्या बेड्या", गर्जला माझा भीमराव, स्त्रीच्या सन्मानासाठी घातला, कायद्याचा घाव. हिंदू कोड बिलाने दिला, तिला बापाचा हिस्सा, जगाला कळला मग, माझ्या भीमाचा किस्सा! आज ती वाघिण होऊन, संसदेत धाडते, पुरुषांच्या बरोबरीने, जगावर राज्य मांडते. जळायचं ते दिवस गेले, आता ती पेटून उठते, भीमाच्या एका कायद्यामुळे, ती आभाळ कवेत घेते .  मनुच्या अंधारातून भीमाच्या प्रकाशाकडे : एका वैचारिक कवितेचे विश्लेषण प्रस्तावना      मराठी व हिंदी साहित्यपरंपरेत कविता ही केवळ सौंदर्याची अभिव्यक्ती नसून सामाजिक वास्तव मांडणारे आणि परिवर्तनाची दिशा दाखवणारे प्रभावी माध्यम राहिले आहे. “मनुच्या अंधारातून भीमाच्या प्रकाशाकडे” असा आशय असलेली कविता सामाजिक विषमता, जात...

लोकशाहीचा चौथा स्तंभ आणि आधुनिक पत्रकारिता

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लोकशाहीचा चौथा स्तंभ आणि आधुनिक पत्रकारिता दिनांक : 20/12/2025 ठिकाण : हिंदी विभाग, शिवाजी विद्यापीठ, कोल्हापूर . शिवाजी विद्यापीठाच्या हिंदी विभागामध्ये 'पीएम उषा' (PM-USHA) योजनेअंतर्गत आयोजित करण्यात आलेल्या 'व्हॅल्यू ॲडेड कोर्स ऑन कंटेंट रायटिंग फॉर मीडिया' या कार्यशाळेचा समारोप आज उत्साहात पार पडला. हा उपक्रम विद्यार्थ्यांसाठी माध्यम क्षेत्रातील बदलत्या प्रवाहांचे आणि नैतिक जबाबदाऱ्यांचे एक महत्त्वाचे मंथन ठरले. या समारोप समारंभासाठी मास कम्युनिकेशन विभागाचे विभागप्रमुख डॉ. शिवाजीराव जाधव प्रमुख पाहुणे म्हणून उपस्थित होते,  कार्यक्रमाचे अध्यक्षपद प्रोफेसर डॉ. तृप्ती करेकट्टी यांनी भूषवले. या संपूर्ण कार्यशाळेचे नियोजन आणि संयोजन हिंदी विभागाचे डॉ. जयसिंग कांबळे सर यांनी केले होते. अविनाश कांबळे यांनी आपल्या ओघवत्या शैलीत कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन केले आणि उपस्थितांचे लक्ष वेधून घेतले. डॉ. शिवाजीराव जाधव यांनी आपल्या मार्गदर्शनात पत्रकारितेच्या गौरवशाली इतिहासाला उजाळा दिला. त्यांनी सांगितले की, भारतातील पत्रकारितेचा पाया संघर्षातून रचला गेला आहे. जेम्स ऑगस्टस हिकी य...