1.1 प्रस्तावना
भारत एक बहुभाषिक देश है। यहाँ भाषाओं की विविधता हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। भौगोलिक परिस्थितियाँ, खानपान, रहन-सहन और परंपराओं के साथ-साथ भाषा के स्तर पर भी भारत अत्यंत विविध दिखाई देता है। ऐसे देश में राष्ट्रीय स्तर पर संवाद, एकता और आपसी समझ बनाए रखने के लिए एक सुविचारित भाषा नीति की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता से त्रिभाषा सूत्र की अवधारणा सामने आई।
1.2 विषय विवेचन
1.2.1 त्रिभाषा सूत्र क्या है?
त्रिभाषा सूत्र का अर्थ है—देश के प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से विद्यार्थियों को कम से कम तीन भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए। इस सूत्र को औपचारिक रूप से 1968 में कोठारी आयोग की सिफारिशों के आधार पर लागू किया गया।
1.2.2 इसका मुख्य उद्देश्य था
- राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना
- विभिन्न भाषाई समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना
- विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्षम बनाना
1.2.3 त्रिभाषा सूत्र में शामिल भाषाएँ त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत निम्नलिखित तीन भाषाएँ अनिवार्य मानी गई हैं,
- मातृभाषा / क्षेत्रीय भाषा
- देश की राजभाषा – हिंदी
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान की भाषा – अंग्रेजी
इन तीनों भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति को सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावहारिक रूप से सशक्त बनाता है।
1.2.4 राज्यों का वर्गीकरण
त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत राज्यों को दो भागों में विभाजित किया गया है—
- हिंदी भाषी प्रदेश
- हिंदीत्तर भाषी प्रदेश
हिंदी भाषी प्रदेश हिंदी भाषी प्रदेशों में भाषा व्यवस्था इस प्रकार होती है
- प्रथम भाषा: मातृभाषा (हिंदी)
- द्वितीय भाषा: आधुनिक भारतीय भाषाओं में से कोई एक(संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से)
- तृतीय भाषा: अंग्रेजी
हिंदीत्तर भाषी प्रदेश हिंदीत्तर भाषी प्रदेशों में भाषा व्यवस्था इस प्रकार होती है—
- प्रथम भाषा: संबंधित राज्य की मातृभाषा (जैसे—महाराष्ट्र में मराठी)
- द्वितीय भाषा: हिंदी
- तृतीय भाषा: अंग्रेजी
1.2.5 मातृभाषा को प्राथमिकता क्यों?
बच्चा जब पहली बार विद्यालय जाता है, तब वह अपनी मातृभाषा से परिचित होता है। मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से बच्चे को सीखने में आसानी होती है उसकी रुचि और आत्मविश्वास बढ़ता है। विद्यालय के प्रति भय और हिचकिचाहट कम होती है। इसी कारण त्रिभाषा सूत्र में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने पर विशेष बल दिया गया है।
1.2.6 हिंदी को स्थान क्यों दिया गया है?
हिंदी भारत की संघ की राजभाषा है। यह देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को जोड़ने का कार्य करती है। हिंदी राष्ट्रीय स्तर पर संवाद की सुविधा देती है। प्रशासन और सामाजिक संपर्क की भाषा है। देश के अधिकांश लोग इसे बोल, समझ और लिख सकते हैं। इसलिए त्रिभाषा सूत्र में हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
1.2.7 अंग्रेजी भाषा का महत्व
अंग्रेजी को आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और व्यापार की भाषा माना जाता है।अंग्रेजी भाषा वैश्विक स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान में सहायक है। उच्च शिक्षा और शोध के अवसर बढ़ाती है। रोजगार और प्रतिस्पर्धा के नए द्वार खोलती है। इसी कारण त्रिभाषा सूत्र में अंग्रेजी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल किया गया है।
1.2.8 निष्कर्ष
त्रिभाषा सूत्र भारत की भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम है। यह विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्षम बनाता है। मातृभाषा से जुड़ाव, हिंदी के माध्यम से राष्ट्रीय संवाद और अंग्रेजी द्वारा वैश्विक ज्ञान—इन तीनों का समन्वय ही त्रिभाषा सूत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।
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