संपर्क भाषा के रूप में हिंदी | हिंदी भाषा का महत्व
प्रस्तावना
संपर्क भाषा का अर्थ एवं अवधारणा
जब दो या दो से अधिक भिन्न मातृभाषा बोलने वाले लोग आपसी विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए किसी तीसरी भाषा का सहारा लेते हैं, तो वही भाषा संपर्क भाषा कहलाती है। संपर्क भाषा का उद्देश्य केवल संवाद स्थापित करना नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जोड़ना भी होता है।
भारत में भाषायी विविधता और संपर्क भाषा की आवश्यकता
भारत का संविधान 22 भाषाओं को आधिकारिक मान्यता देता है, जबकि देश में लगभग 2796 भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलित हैं। इतनी विशाल भाषायी विविधता वाले देश में किसी एक ऐसी भाषा की आवश्यकता स्वाभाविक है, जो सभी क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ सके। इस आवश्यकता को हिंदी भाषा ने सफलतापूर्वक पूरा किया है। हिंदी न तो किसी एक धर्म की भाषा है और न ही किसी एक प्रांत तक सीमित है, बल्कि यह संपूर्ण भारत में संपर्क भाषा के रूप में स्वीकार की गई है।
ऐतिहासिक दृष्टि से संपर्क भाषा
- प्राचीन भारत में संस्कृत देश की संपर्क भाषा थी।
- बौद्ध काल में पाली और प्राकृत भाषाओं ने संपर्क भाषा की भूमिका निभाई।
- लगभग सातवीं शताब्दी में सिद्धों, नाथों और संतों ने जनसामान्य से जुड़ने के लिए हिंदी को अपनाया।
- ईसाई मिशनरियों ने भी अपने धर्म के प्रचार हेतु हिंदी भाषा का प्रयोग किया।
- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदी ने देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आधुनिक भारत में संपर्क भाषा के रूप में हिंदी
आज हिंदी भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है।
- जनसंचार माध्यमों (समाचार पत्र, दूरदर्शन, रेडियो, सोशल मीडिया) में हिंदी का व्यापक प्रयोग हो रहा है।
- फ़िल्म उद्योग में हिंदी भाषा का प्रभाव देश-विदेश तक फैला हुआ है।
- महानगरों में हिंदी एक प्रभावी संपर्क भाषा के रूप में प्रयुक्त होती है।
- विदेशों में बसे भारतीय विभिन्न राज्यों के लोग आपसी संवाद के लिए हिंदी का सहारा लेते हैं।
संपर्क भाषा के लाभ
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा
- राज्यों और समुदायों के बीच संवाद स्थापित करना
- व्यापार, उद्योग और रोजगार में वृद्धि
- प्रशासन और शासन में सुविधा
- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूती
- संपर्क भाषा किसी देश की राजभाषा या राष्ट्रभाषा भी हो सकती है। भारत में जहाँ हिंदी संपर्क भाषा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेज़ी को विश्व की संपर्क भाषा माना जाता है।
हिंदी का अंतरराष्ट्रीय विस्तार
हिंदी भारत के साथ-साथ नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, तिब्बत, अफगानिस्तान आदि देशों में भी बोली और समझी जाती है। आज हिंदी वैश्विक स्तर पर एक सशक्त भाषा के रूप में उभर रही है।

निष्कर्ष
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि संपर्क भाषा समाज को जोड़ने वाली सेतु के समान होती है। भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी ने इस भूमिका को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से निभाया है। हिंदी ने न केवल देश के विभिन्न राज्यों और समुदायों को आपस में जोड़ा है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ किया है। आज के युग में हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक बन चुकी है। इसलिए यह कहना पूर्णतः उचित है कि हिंदी भारत की सबसे सशक्त संपर्क भाषा है।


Comments
Post a Comment