हिंदी राष्ट्रभाषा या राजभाषा - सौरभ कांबले
1.1 प्रस्तावना :
भारत में हिंदी भाषा को लेकर अक्सर यह विवाद देखने को मिलता है कि हिंदी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा। भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाएँ हैं तथा लगभग 3000 से अधिक बोलियाँ प्रचलित हैं। ऐसी भाषिक विविधता वाले देश में भाषा से संबंधित भ्रम उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इसी कारण यह प्रश्न उठता है कि हिंदी भाषा की वास्तविक स्थिति क्या है। प्रस्तुत लेख में हिंदी भाषा की संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।
1.2 विषय विवेचन : भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहाँ अनेक भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलन में हैं।इसलिए भाषा और पहचान का प्रश्न हमेशा केंद्र में रहा है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज की सोच और चेतना को भी आकार देती है। मीडिया, समाज और लोकतंत्र के बीच के इस गहरे संबंध को समझने के लिए लोकशाहीचा चौथा स्तंभ आणि आधुनिक पत्रकारिता इस लेख में पत्रकारिता की भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया गया है। स्वतंत्रता से पूर्व हिंदी भाषा ने देश के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ने का कार्य किया। भक्ति काल तथा मध्यकाल में संतों और समाज सुधारकों ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण हिंदी जनसंपर्क की भाषा के रूप में विकसित हुई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी देश की एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनी। इसी पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता के पश्चात हिंदी को प्रशासनिक कार्यों में अपनाने की आवश्यकता महसूस की गई। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। तत्पश्चात 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी भाषा को भी सहायक राजभाषा का दर्जा दिया गया। यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं, बल्कि संघ की राजभाषा है।
1.3 राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर :अ ) राष्ट्रभाषा
- राष्ट्रभाषा वह भाषा होती है जिसे देश की अधिकांश जनता आपसी व्यवहार, विचार-विमर्श और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रयोग करती है।
- यह जनसामान्य की भाषा होती है, जिसमें विविध बोलियों और उपबोलियों का समावेश होता है।
- राष्ट्रभाषा में नई शब्दावली लोगों के प्रयोग के अनुसार जुड़ती हैं ।
- राष्ट्रभाषा का प्रयोग सामान्यतः अनौपचारिक संदर्भों में किया जाता है, जैसे सार्वजनिक स्थल, सभाएँ, बाजार, गली-मोहल्ले आदि।
- राष्ट्रभाषा नियमों में बंधी नहीं होती हैं ।
- राष्ट्रभाषा के माध्यम से लोगों की भावना, विश्वास, धर्म, समाज और संस्कृति आदि बातें सामने आती हैं ।
- राजभाषा वह भाषा होती है जिसका प्रयोग सरकारी, प्रशासनिक, कानूनी और संवैधानिक कार्यों में किया जाता है।
- राजभाषा की शब्दावली निश्चित और मानक होती है तथा इसमें नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
- भारत में संघ स्तर पर हिंदी राजभाषा के रूप में प्रयुक्त होती है, जबकि राज्यों को अपनी-अपनी राजभाषाएँ निर्धारित करने का अधिकार है ।
- संक्षेप में यह कहाँ जा सकता हैं की “राष्ट्रभाषा एक बड़ा उद्यान हैं और राजभाषा इनमें से एक विशेष प्रकार का फूलों का गुलदस्ता हों । इन दोनों अपना अलग – अलग महत्व हैं।”
हिंदी भाषा बहुत पहले से ही संपर्क भाषा के रूप में सामने आई है उदाहरण के रूप में पाकिस्तान और बांग्लादेश की भाषा भी हिंदी थी। आज हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा भी है, संपर्क भाषा भी है और राजभाषा भी है। हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार करने का यह भी कारण है कि यह भाषा भारत के सभी लोगों में अधिकतर बोली जाती थी और स्वतंत्रता संग्राम में इस भाषा ने लोगों को जोड़ने का कार्य किया था इसी कारण ही हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में भारत में स्वीकार किया गया है। राष्ट्रभाषा को नेशनल लैंग्वेज कहा जाता है। राष्ट्रभाषा संपूर्ण देश में एकता स्थापित करने का प्रयास करती है।
1.5 राजभाषा :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी होगी तथा उसकी लिपि देवनागरी होगी। राजभाषा को अंग्रेजी में ऑफिशल लैंग्वेज कहा जाता है। सभी सरकारी कार्यालय में इसी का प्रयोग होता है। देश का कामकाज जिस भाषा में चलता है उसे राजभाषा कहते हैं। हर राज्य की अपनी अलग राज्य भाषा है हो सकती है जैसे की महाराष्ट्र की मराठी, कर्नाटक की कन्नड़, गुजरात की गुजराती, पंजाब की पंजाबी कुछ इस प्रकार हर एक राज्य की राज्य भाषा अलग होती है। इसे भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत यह सुविधा राज्यों को दी गई है।
1.6 भारतीय संविधान में हिंदी भाषा के अनुच्छेद :
अनुच्छेद 343 – संघ की राजभाषा

1.6 भारतीय संविधान में हिंदी भाषा के अनुच्छेद :
अनुच्छेद 343 – संघ की राजभाषा
अनुच्छेद 343(1) के अनुसार भारत संघ की राजभाषा हिंदी होगी और उसकी लिपि देवनागरी होगी। इसके साथ ही यह भी प्रावधान किया गया कि प्रारंभिक अवधि में संघ के सरकारी कार्यों के लिए अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग जारी रखा जा सकता है। यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, न कि राष्ट्रभाषा का।
अनुच्छेद 344 – राजभाषा आयोग और संसदीय समितिइस अनुच्छेद के अंतर्गत राजभाषा के प्रयोग और विकास के लिए राजभाषा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। आयोग का कार्य हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना तथा प्रशासनिक कार्यों में भाषाई सुधार के सुझाव देना होता है। साथ ही, इन सिफारिशों की समीक्षा के लिए संसदीय समिति का भी प्रावधान किया गया है।
अनुच्छेद 345 – राज्य की राजभाषाअनुच्छेद 345 के अनुसार प्रत्येक राज्य को यह अधिकार है कि वह अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए अपनी राजभाषा निर्धारित करे। राज्य विधानसभा यह निर्णय ले सकती है कि राज्य में हिंदी, अंग्रेज़ी या कोई अन्य क्षेत्रीय भाषा राजभाषा के रूप में प्रयोग की जाए।
अनुच्छेद 346 – राज्यों के बीच संचार की भाषा
यह अनुच्छेद राज्यों के आपसी पत्राचार और संघ–राज्य संचार की भाषा से संबंधित है। सामान्यतः ऐसे संचार में हिंदी या अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग किया जाता है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में समानता बनी रहे।
अनुच्छेद 347 – किसी राज्य में विशेष भाषा की मान्यतायदि किसी राज्य की जनसंख्या का एक बड़ा भाग यह मांग करता है कि उनकी भाषा को मान्यता दी जाए, तो राष्ट्रपति उस भाषा को उस राज्य में विशेष मान्यता प्रदान कर सकते हैं। यह प्रावधान भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
अनुच्छेद 348 – न्यायालयों और विधायी कार्यों की भाषाइस अनुच्छेद के अनुसार उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा विधायी दस्तावेजों की भाषा सामान्यतः अंग्रेज़ी होगी। हालांकि, राष्ट्रपति की अनुमति से राज्यों में हिंदी या अन्य भाषाओं का प्रयोग भी किया जा सकता है।
अनुच्छेद 349 – भाषा संबंधी विधेयकों के लिए विशेष प्रक्रिया
यह अनुच्छेद यह सुनिश्चित करता है कि भाषा से संबंधित किसी भी विधेयक को पारित करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी। इसका उद्देश्य भाषाई संतुलन बनाए रखना है।
अनुच्छेद 350 – नागरिकों को भाषा संबंधी अधिकार
अनुच्छेद 350 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार है कि वह अपनी शिकायतें या आवेदन अपनी मातृभाषा में प्रस्तुत कर सके। यह प्रावधान भाषाई समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों को सुदृढ़ करता है।
अनुच्छेद 351 – हिंदी भाषा का विकासअनुच्छेद 351 के अनुसार संघ सरकार का यह कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा के विकास और प्रचार के लिए प्रयास करे। हिंदी का विकास इस प्रकार किया जाना चाहिए कि वह भारत की विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों से शब्द और भाव ग्रहण कर सके तथा एक समन्वयक संपर्क भाषा के रूप में विकसित हो।
1.7 निष्कर्ष :
उपरोक्त विवेचन के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक महत्व का विषय है। हिंदी भाषा ने ऐतिहासिक रूप से देश के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य किया है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संवैधानिक दृष्टि से देखा जाए तो भारत की कोई भी घोषित राष्ट्रभाषा नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। अनुच्छेद 343 से 351 तक के प्रावधान हिंदी भाषा के प्रयोग, विकास और प्रशासनिक भूमिका को स्पष्ट करते हैं, साथ ही भारत की भाषाई विविधता और अन्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण पर भी बल देते हैं। भाषा और शिक्षा की यात्रा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह व्यक्ति के संपूर्ण जीवन को प्रभावित करती है। शिक्षा के मार्ग पर आने वाले अनुभवों और संघर्षों को यदि मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो गर्दीत मिळालेली पदवी आणि आनंदाचा श्वास यह लेख उन अनुभवों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति प्रस्तुत करता है।
अतः यह कहा जा सकता है कि हिंदी भाषा राष्ट्रभाषा नहीं है, लेकिन वह भारत की एक सशक्त संपर्क भाषा, सांस्कृतिक एकता का प्रतीक और संघ की राजभाषा अवश्य है। संविधान द्वारा हिंदी के विकास हेतु किए गए प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि भविष्य में भी हिंदी भाषा भारतीय समाज में समन्वय और एकता की भूमिका निभाती रहे। इस प्रकार राष्ट्रभाषा और राजभाषा के बीच के अंतर को समझना भाषाई भ्रम को दूर करने और भाषिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।


Nice 👍
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